PATNA:- ज्योतिषाचार्य राजन उपाध्यायके अनुसार पितर और पुत्र में सम्बन्ध पितर का अर्थ पितृ या श्रेष्ठजन होता है और बृहदारण्यक उपनिषद् अनुसार पुत्र वह है जो न किए गए कार्यों से अपने पिता की रक्षा करता है पुत् का अर्थ पूरा करना है और त्र का अर्थ रक्षा करना है, प्रत्येक मनुष्य पर तीन ॠण होते हैं,पितृ ॠण, दैव ॠण और गुरु ॠण,मनुष्य लोक में पिता मृत्यु समय अपना सब कुछ पुत्र या पुत्री को सौंप देते हैं,इसलिए संतान पर पितृ ॠण होता है और श्राद्ध पक्ष एक अवसर देता है हम सब को अपने पितरों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का, श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों का पिण्डदान किया जाता है,पिण्ड एक प्रतीक है,जीवन की शुरूआत का पिण्ड का अर्थ शरीर है जिसमें समग्र ब्रह्माण्ड की छवि आलोकित है और उस सत्य की अभिव्यक्ति छान्दोग्य उपनिषद् में वर्णित तत्-त्वम्-असि शब्दों द्वारा होती है.पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाते रहना चाहिए, केसर का तिलक लगाएं विष्णु भगवान के मंत्र जाप करें, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ व गुरु गीता, का पाठ करें