पटना( Post2pillar) : आचार्य पंडित राजन कुमार उपाध्याय बताते है की माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन हो जाएगा। इस दिन सम्पूर्ण विधि विधान से मां सरस्वती के पूजन करने का विधान है। लेखक, कवि, संगीतकार और विद्यार्थी सभी सरस्वती की प्रथम वंदना करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनके भीतर रचना की ऊर्जाशक्ति उत्पन्न होती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पीले रंग का भी विशेष महत्व बताया गया है। वसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ या किसी भी शुभ कार्य के लिए बेहद उत्तम माना जाता है। पीला रंग अहिंसा,प्रेम,आनंद और ज्ञान का प्रतीक है।श्री विष्णु और उनके अवतारों को पीताम्बर धारण करवाने का यह प्रमुख कारण है। यह रंग सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज को तो निखरता ही है,साथ ही पीले वस्त्र धारण करने से देव गुरु वृहस्पति भी प्रसंन होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पीला रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना गया है। वसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है, सूर्य की किरणों से पृथ्वी पीली होती जाती है। सूर्य की पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि हमे सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। इस दिन पीले रंग के प्रयोग से सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज में वृद्धि होती है। ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है और ज्ञान से ही सबकुछ संभव है. शास्त्रों में ज्ञान प्राप्त करने के लिए कई विधियां बताई हैं पर सबसे सरल और सहज विधि मां सरस्वती की पूजा को बताया गया है. मां सरस्वती की नियमित पूजा से बुद्धि और वैभव दोनों की प्राप्ति होती है. मां सरस्वती को बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है.पूजन के उपरांत इस मंत्र का अवश्य जाप करना चाहिए ! ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः