पटना : ज्योतिषी राजन कुमार उपाध्याय के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष के बाद यदि किसी दोष को खतरनाक माना जाता है, तो वह है पितृ दोष है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष में भी व्यक्ति को कालसर्प दोष की तरह ही फल भोगने पड़ सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के कुंडली में शुभ और अशुभ दोनों तरह के योग बनते हैं. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ योग बनते हैं. तो व्यक्ति को जीवन में सुख-सुविधाएँ और धन दौलत प्राप्त होती है. वहीं यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह नक्षत्रों के संयोग से कोई अशुभ दोष का निर्माण होता है. तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करना पड़ता है और सफलताएं बहुत कम मिलती हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताए गए दोषों में सबसे ज्यादा प्रभावी दोष कालसर्प दोष और पितृदोष को माना गया है. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित राजन उपाध्याय बता रहे हैं, कुंडली में पितृ दोष का निर्माण कैसे होता है और इसके प्रभाव क्या है ?
पितृदोष क्या होता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब हमारे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त नहीं होती, तो ये आत्माएं पृथ्वी लोक में रहने वाले अपने वंश के लोगों को कष्ट देती हैं. इसी को ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष कहा गया है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु लोक पर हमारे पूर्वजों की आत्माएं अपने परिवार के सदस्यों को देखती रहती हैं. जो लोग अपने पूर्वजों का अनादर करते हैं, या उन्हें कष्ट देते हैं. इससे दुखी दिवंगत आत्माएं उन्हें शाप देती हैं इसी शाप को पितृ दोष माना जाता है.
कुंडली में पितृ दोष कैसे बनता है
ज्योतिष घटनाओं के हिसाब से जब किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न भाव और पांचवें भाव में सूर्य मंगल और शनि विराजमान होते हैं, तो पितृदोष बनाते हैं. इसके अलावा कुंडली के अष्टम भाव में गुरु और राहु एक साथ आकर बैठते हैं, तो भी पितृदोष का निर्माण होता है. जब कुंडली में राहु केंद्र में या त्रिकोण में मौजूद होता है, तो पितृ दोष बनता है. इसके अलावा जब सूर्य, चंद्रमा और लग्नेश का राहु से संबंध होता है, तो जातक की कुंडली में पितृ दोष बनता है. जब कोई व्यक्ति अपने से बड़ों का अनादर करता है, या फिर उसकी हत्या कर देता है, तो ऐसे व्यक्ति को पितृ दोष लगता है.
पितृदोष के लक्षण
आपके जीवन में जब किसी व्यक्ति की कुंडली में पपितृदोष होता है. तो ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे व्यक्ति के विवाह में देरी होती है. सगाई टूट सकती है. वैवाहिक जीवन में तनाव रहता है. ऐसी महिलाओं को गर्भधारण में समस्याएं आती हैं. बच्चे की अकाल मृत्यु हो सकती है. जीवन में कर्ज और नौकरी में परेशानियां आती रहती हैं. इसके अलावा ऐसे लोगों के घर में या परिवार में आकस्मिक निधन या दुर्घटना हो सकती है. लंबे समय से किसी बीमारी के चलते परेशान रह सकते हैं. परिवार में विकलांग या अनचाहे बच्चे का जन्म हो सकता है. ऐसे व्यक्ति को बुरी आदतों की लत भी लग सकती है.