प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन को राष्ट्रपति को समर्पित कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही राष्ट्रीय जनता दल द्वारा किया गया ट्वीट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल, आरजेडी ने ट्वीट कर नए संसद भवन की तुलना ताबूत से की है। आरजेडी के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ताबूत के साथ नए संसद भवन की एक फोटो शेयर किया गया। इसके साथ ही ट्वीट में दोनों तस्वीर को दिखाते हुए लिखा गया- ”ये क्या है?”। आरजेडी की सहयोगी इस पर कहा कि कलंक का इतिहास लिखा जा रहा है। इस पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने कहा कि यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है। बीजेपी ने आरजेडी सांसद से इस्तीफे की मांग की है।
ट्वीट पर स्पष्टीकरण देते हुए कही ये बात
आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने ट्वीट पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, ”हमने जो यह चिन्ह लगाया है वो इसलिए लगाया है कि राजनीति और लोकतंत्र का ताबूतीकरण नहीं करें। हमने शुरू से कहा है कि लोकतंत्र का मंदिर संवाद का है। संवादहीनता जिस तरह से देश में बढ़ा है। जिस तरह से अधिनायकवाद थोपने की कोशिश की जा रही है.संविघान का मजाक उड़ाया जा रहा है। हमने किसी मर्यादा और सीमा को लांघा नहीं है। लोकतंत्र के मंदिर के ताबूतीकरण पर सवाल लाजमी हैं। आज अगर प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रपति भी होतीं तो और अच्छे चित्र आते, लेकिन यह आत्ममुग्धता की दहलीज पर खड़े होकर जिस तरह का इवेंट किया जा रहा है और महिमा मंडन हो रहा है. यह किसी का इवेंट नहीं हो सकता है।”
नीतीश कुमार ने कहा, नए संसद भवन की जरूरत नहीं
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र क्या कर रहा है, यह देख ही रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पटना में कार्यक्रम की वजह से वह बैठक में नहीं जा सके। अगर जाते तो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने और देशभर में जातिगत जनगणना कराने की मांग करते। उन्होंने आगे कहा कि नए ससंद भवन की कोई जरूरत नहीं थी।
