पटना से राजन कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट-
बिहार पब्लिक स्कुल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने कोरोना की महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट की गंभीरता को समझते हुए। निजी विद्यालयों में उत्पन्न समस्याओं के निवारण हेतु, जहां निजी विद्यालयों का खर्च बच्चों की फीस पर ही निर्भर होता है। निजी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मियों का वेतन भुगतान भी बच्चों के फीस पर ही निर्भर होता है।
अभिभावकों की भी आर्थिक स्थिति को समझते हुए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी. के. सिंह ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से मांग किया है कि निजी विद्यालयों को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाए। जिससे विद्यालयों के द्वारा मध्यम एवं निम्न मध्यम वर्ग के अभिभावकों को चिन्हित कर, उनके 2 माह का फीस माफ किया जा सके । जिससे निजी विद्यालयों मे कार्यरत कर्मियों का वेतन भुगतान भी सम्भव हो जाएगा और मध्यम एवं निम्न मध्यम वर्ग के अभिभावकों को राहत भी मिल जाएगी। डॉ. डी. के. सिंह ने सरकार से RTE के पैसों की मांग करते हुए कहा कि आर्थिक संकट की इस परिस्थिति मे RTE का बकाया पैसा अगर निजी विद्यालयों को निर्गत कर दिए जाएं तो यह बहुत बड़ा राहत का कार्य होगा।
संगठन के सह-सचिव प्रेम रंजन ने कहा कि निजी विद्यालयों पर खर्च का भार अधिक होता है। बच्चों का फीस नहीं आने के कारण दो माह से शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों का वेतन भुगतान लंबित है। इस पर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को ध्यान देने की जरूरत है जिससे अभिभावकों, शिक्षकों एवं पूर्ण निजी विद्यालय परिवार को कोरोना से निपटने का साहस एवं ऊर्जा संचारित हो सके।
दूसरी मांग करते हुए प्रेम रंजन ने कहा कि बिहार मे हज़ारों की संख्या मे ऐसे बच्चे हैं जिनका भविष्य आज अधर मे फंसा है। ये वैसे बच्चे हैं जो किसी निजी विद्यालय मे नामांकन लेने वाले थे। कुछ बच्चों ने नामांकन के लिए आवेदन किया था, तो किसी बच्चे का नामांकन टेस्ट भी हो चुका था परन्तु परिणाम आने बाकी थे। ऐसी स्थिति मे लॉक डाउन हो जाने के कारण, ना उनका नामांकन सुनिश्चित हो पाया, नहीं उन्हें पुस्तक उपलब्ध हो पाया। संगठन ने सरकार से अनुरोध किया है कि कि सरकार निजी विद्यालयों को नामांकन की प्रक्रिया एवं पुस्तक वितरण हेतु विद्यालय कार्यालय खोलने के लिए न्यूनतम 5 दिन की अवधि प्रदान करें। इस अवधि के दरमियान बच्चों के अभिभावक सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए विद्यालय के कार्यालय में जाकर उनका नामांकन सुनिश्चित कराएं एवं उनके पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तक पर्याप्त करेंगे।